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प्रकृति की देन

आरूष सोनवणे, सिलवासा

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प्रकृति की देन

पेडो ने दी छाया,
पेडो ने दिए फल,
प्रकृति का जादू कैसा अनमोल अवल॥

प्रकृति ने दिए खेत,
प्रकृति ने दिया जल।
प्रकृति की यें माया,
नहीं है कोई छल।
प्रकृति का जादू कैसा अनमोल अवल॥

प्रकृति ने दिए अनमोल फूल,
दिए विविध हमें फसल।
प्रकृति की देन हैं प्यारी,
इसे उपहार समझके चल।
प्रकृति का जादू कैसा अनमोल अवल॥

है बडा अनमोल यें
प्रकृति का एहसान,
इसें कभी मत भूल
मनुजा कर तू उसका सन्मान।
मनुजा कर तू उसका सन्मान ॥

आरूष सोनवणे, सिलवासा
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Bindhast

कार्यालय पत्ता: मराठीचे शिलेदार प्रकाशन व बहुउद्देशीय संस्था, नागपूर क्लस्टर ४/अ ००३ कांचनगंगा टाऊनशीप, मोंढा ता.हिंगणा,जि.नागपूर संपर्क:9834739798\7385363088

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