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पेरणी
चला तय्यार करूया
बाल मनाची धरणी
नितीमूल्य संस्कारांची
त्यात करण्या पेरणी.. //
संत संगती घडावी
घ्यावा सात्विक आहार
जिथे लाभे प्रसन्नता
व्हावा तिथेच विहार… //
माता,पिता,गुरू,नारी
यांचे शिकावे पावित्र्य
शिलवंत गुणवंत
त्यांचे घडावे चारित्र्य.. //
सत्य, सत्व, तत्त्वनिष्ठ
करू निर्माण संतती
बल, बुद्धी युक्त युवा
हीच राष्ट्रीय संपत्ती… //
ज्ञान,विज्ञान,अद्यात्म
युद्ध नव्हे बुद्ध धरू
तेंव्हा होईल भारत
निर्विवाद विश्व गुरू… //
विष्णू संकपाळ बजाजनगर
जि.छ. संभाजीनगर
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